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साहिर लुधियानवी उर्दू और हिंदी साहित्य की दुनिया में एक ऐसा नाम है, जिनकी शायरी ने पीढ़ियों को प्रभावित किया। उनकी रचनाओं में समाज की सच्चाई, मोहब्बत की गहराई और इंसानियत की पुकार साफ झलकती है। हर शेर उनके अनुभव और संवेदनशीलता का अनमोल प्रमाण है।
उनकी शायरी केवल अल्फ़ाज़ का खेल नहीं, बल्कि ज़िंदगी का आईना है। साहिर के अल्फ़ाज़ सीधे दिल में उतरते हैं और सोचने पर मजबूर करते हैं। यही कारण है कि उनका नाम हमेशा साहित्य प्रेमियों और शायरी चाहने वालों की जुबान पर रहता है।
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आज भी उनकी लिखी पंक्तियाँ किताबों में ही नहीं, बल्कि लोगों की बातचीत, फिल्मों और गज़लों में जिंदा हैं। साहिर की शायरी मोहब्बत के साथ-साथ समाजिक मुद्दों को भी सामने लाती है, और यही उनकी सबसे बड़ी पहचान है।
साहिर लुधियानवी की बेहतरीन शायरी
“हम ग़मज़दा हैं लाएँ कहाँ से ख़ुशी के गीत,
देंगे वही जो पाएँगे इस ज़िंदगी से हम।”
“तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है,
तेरे बिना तो सब अधूरा सा लगता है।”Advertisement
“हमसे मत पूछिए कैसे मंज़र होंगे,
हम तो अपनी ही ग़ज़ल भूल गए होंगे।”
“ज़िंदगी सिर्फ़ मोहब्बत नहीं,
और भी ग़म हैं ज़माने में राहत के सिवा।”
“तेरी चाहत में जिए हैं हम,
तेरी यादों से सजे हैं हम।”
“वो अफ़साने जो कभी अधूरे रह गए,
आज भी दिल में किसी कोने में जिंदा हैं।”
“मोहब्बत तुझे पाने की जिद्द नहीं,
तेरी ख़ुशी की दुआ है बस।”
“न जाने कितने सवाल हैं दिल में,
पर अल्फ़ाज़ में ढल नहीं पाते।”
“हर दर्द को शायरी में उतारना सीखा,
साहिर ने ग़म को भी खूबसूरत बना दिया।”
“तेरे बिना भी ये ज़िंदगी गुज़र जाएगी,
पर तेरे साथ होती तो और भी हसीन होती।”
शायरी शेयर करने का आनंद
साहिर लुधियानवी की शायरी दिल को छू लेने वाली होती है और इन्हें दोस्तों व अपनों के साथ साझा करना और भी खास बना देता है। आप इन शायरियों को WhatsApp पर भेज सकते हैं, Facebook पोस्ट के रूप में डाल सकते हैं, या Twitter पर छोटे-छोटे शेर साझा कर सकते हैं। इसके अलावा Telegram ग्रुप, Instagram स्टोरीज़ और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी इन खूबसूरत अल्फ़ाज़ को शेयर कर सकते हैं।
साझा करने से न केवल आपके जज़्बात सामने आते हैं, बल्कि शायरी का असली आनंद भी कई गुना बढ़ जाता है।