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रमज़ान का महीना बरकतों, रहमतों और नेकी का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र समय में लोग इबादत, रोज़ा और दुआओं से अपने जीवन को सुकून और सच्चाई से भर देते हैं। शायरी हमेशा से जज़्बात को व्यक्त करने का सबसे खूबसूरत तरीका रही है और जब बात रमज़ान की हो तो शायरी दिलों को और भी करीब ला देती है।
रमज़ान शायरी न सिर्फ इस पाक महीने की रूहानियत को बयां करती है बल्कि इंसान को एक-दूसरे से मोहब्बत और भाईचारे की राह पर भी ले जाती है। इसमें सादगी, उम्मीद और अल्लाह की रहमतों का जिक्र मिलता है।
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यह शायरी दोस्तों, परिवार और अपनों तक भावनाओं को पहुँचाने का एक अच्छा ज़रिया है। रमज़ान के इन अनमोल लम्हों को और ख़ास बनाने के लिए शायरी साझा करना एक सुंदर एहसास देता है।
आजकल सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग रमज़ान से जुड़ी शायरी को खूब शेयर करते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर यह शायरी न सिर्फ दिल को छूती है बल्कि अपनों के बीच मोहब्बत और अपनापन भी बढ़ाती है।
रमज़ान शायरी
रमज़ान का महीना आया है, रहमतों की सौग़ात लाया है,
दुआओं में जो माँग लो, अल्लाह सब पूरा करता है।Advertisement
रोज़े की ताज़गी दिल में उतर जाए,
दुआओं का असर जिंदगी सँवार जाए।
हर लम्हा बरकत का पैग़ाम हो,
रमज़ान में तेरी हर दुआ कबूल हो।
सबर की राह दिखाता है ये महीना,
नेकी की तरफ बढ़ाता है रमज़ान करीम।
रातों की तन्हाई में जब सजदे होंगे,
तो आँखों से अश्क़ दुआओं में ढलेंगे।
रमज़ान की रौशनी दिलों को चमकाती है,
हर इंसान को सच्चाई की ओर बुलाती है।
रोज़ा सिखाता है भूख का सबक,
नेकी और रहमत का ये है हक़।
दुआओं से महक उठेगी ये फिज़ा,
रमज़ान का हर दिन बनेगा दुआओं का सिला।
रमज़ान में इबादत से दिल को सुकून मिले,
हर रोज़े से नई उम्मीद और जुनून मिले।
ये महीना मोहब्बत का पैग़ाम देता है,
अल्लाह से करीब होने का इनाम देता है।