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निदा फ़ाज़ली साहब उर्दू और हिंदी के उन शायरों में गिने जाते हैं जिनकी कलम ने इंसान के जीवन की गहराइयों को बखूबी छुआ। उनकी शायरी आम ज़िंदगी के अनुभवों, रिश्तों और भावनाओं की सच्चाई को सरल और असरदार अंदाज़ में बयां करती है। उनके अल्फ़ाज़ न सिर्फ़ सुनने वालों को सोचने पर मजबूर करते हैं बल्कि हर दिल में गहरी छाप छोड़ जाते हैं।
निदा फ़ाज़ली की शायरी रिश्तों की बारीकियों, मोहब्बत की सादगी और ज़िंदगी के संघर्ष को बयां करती है। उन्होंने कठिन विषयों को भी आसान शब्दों में ढालकर हर वर्ग के लोगों तक पहुंचाया। यही वजह है कि उनकी नज़्में और ग़ज़लें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके ज़माने में थीं।
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उनकी लिखी हुई पंक्तियाँ हमें यह एहसास कराती हैं कि शायरी केवल तुकबंदी नहीं बल्कि जीवन की सच्चाई का आईना है। चाहे दोस्ती हो, मोहब्बत या अकेलापन—निदा साहब के अल्फ़ाज़ हर भाव को जिंदा कर देते हैं। हिंदी और उर्दू साहित्य में उनका योगदान अद्वितीय और अमर है।
निदा फ़ाज़ली की मशहूर शायरी
“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।”
“हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,
जिसको भी देखना हो कई बार देखना।”Advertisement
“ख़ामोश क्यों हो बोलो कि ज़िंदगी अभी है,
कुछ दिल में दर्द है तो कहो कि ज़िंदगी अभी है।”
“सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो।”
“अपना ग़म ले के कहीं और न जाया जाए,
घर में बिखरी हुई चीज़ों को सजाया जाए।”
“हर किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता,
कभी ज़मीं तो कभी आसमाँ नहीं मिलता।”
“दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है।”
“बाज़ार से गुज़रा हूँ खरीदार नहीं हूँ,
ख़ुद अपने ख़यालों का तलबगार नहीं हूँ।”
“ज़िंदगी क्या है इसे मत पूछो,
अपनी ही मुश्किलों का हल पूछो।”
“अपनी मरम्मत ख़ुद करो,
अपने ज़ख़्मों की दवा ख़ुद बनो।”
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निदा फ़ाज़ली की शायरी केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी साझा किया जा सकता है। आप इन शायरी को WhatsApp, Facebook, Instagram, Twitter और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर शेयर कर सकते हैं। जब ये अल्फ़ाज़ अपनों तक पहुँचते हैं तो उनका असर और गहरा हो जाता है।