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निदा फ़ाज़ली उर्दू और हिंदी शायरी के उन महान नामों में से एक हैं, जिनकी रचनाएँ सीधे दिल को छू लेती हैं। उनकी शायरी में जीवन की गहराई, रिश्तों की सच्चाई और मानवीय संवेदनाओं की झलक मिलती है। साधारण शब्दों में लिखी गई उनकी पंक्तियाँ पाठक को गहरी सोच और भावनाओं की दुनिया में ले जाती हैं।
निदा फ़ाज़ली की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने जटिल शब्दों से बचकर सरल भाषा का सहारा लिया। उनकी शायरी हर वर्ग के व्यक्ति को अपनी कहानियों और भावनाओं का आईना दिखाती है। चाहे मोहब्बत की बातें हों या जीवन की सच्चाइयाँ, हर जगह उनकी रचनाओं में संवेदनशीलता झलकती है।
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आज भी लोग उनकी शायरी को पढ़ते और याद करते हैं। दोस्तों के बीच महफ़िलों में, किताबों के पन्नों पर और सोशल मीडिया पर उनकी रचनाएँ लगातार साझा की जाती हैं। यही कारण है कि उनकी शायरी पीढ़ी दर पीढ़ी दिलों में बस गई है।
निदा फ़ाज़ली की मशहूर शायरियाँ
“हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी,
जिसको भी देखना हो कई बार देखना।”
“घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हँसाया जाए।”Advertisement
“दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है।”
“अपनी मरज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं,
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं।”
“बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर,
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ।”
“ढूँढना ही न पड़ा गाँव में गुमशुदगी का,
लोग खुद ही मुझे वापस ले आए घर मेरा।”
“ख़ुदा किसी को न दे कारोबार आईनों का,
हर एक शख़्स यहाँ पर ख़रीदार निकला।”
“हर आदमी में होते हैं सौ चेहरे,
और हर चेहरे के पीछे छुपा चेहरा।”
“हर एक हँसी को चुपचाप पढ़ना पड़ता है,
हर एक आँसू का मतलब समझना पड़ता है।”
“मिट्टी का शरीर है और ख़्वाब काँच के,
सम्भाल कर चलो ये मकाँ टूट जाएगा।”
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निदा फ़ाज़ली की शायरी सिर्फ़ पढ़ने के लिए ही नहीं बल्कि साझा करने के लिए भी है। आप इन पंक्तियों को अपने दोस्तों और परिवार के साथ WhatsApp, Facebook, Twitter, Instagram और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर साझा कर सकते हैं। उनकी शायरी रिश्तों को मज़बूत करने और भावनाओं को व्यक्त करने का सबसे सुंदर माध्यम है।