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Mirza Ghalib Shayari in Hindi Language

Mirza Ghalib Shayari in Hindi Language

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मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू और फ़ारसी साहित्य के ऐसे महान शायर थे, जिनकी शायरी समय और सीमाओं से परे आज भी जीवित है। उनके शब्दों में एक जादू है, जो सीधे दिल तक पहुँचता है। ग़ालिब की ग़ज़लें और शेर जीवन, प्रेम, दर्द और इंसानियत की सच्चाई को बेहद ख़ूबसूरती से बयान करते हैं।

हिंदी भाषा में ग़ालिब की शायरी का अनुवाद और प्रसार उन्हें और भी अधिक पाठकों तक पहुँचाता है। उनके शेर केवल मोहब्बत तक सीमित नहीं, बल्कि इंसान के हर एहसास को छूते हैं। यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लोगों की ज़िंदगी में अपनी जगह बनाए हुए है।

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ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयान इतना गहरा और सजीव है कि हर पीढ़ी उनके शेरों में अपने दिल की धड़कन खोज लेती है। यही वजह है कि उनकी शायरी हिंदी में भी उतनी ही लोकप्रिय है जितनी उर्दू में।

यहाँ हम आपके लिए मिर्ज़ा ग़ालिब की कुछ बेहतरीन शायरी हिंदी भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आप उनके विचारों और भावनाओं की गहराई महसूस करेंगे।

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी हिंदी में

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों

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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है, ये वो आतिश ग़ालिब कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

हमें मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है

न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले

दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है कि हम भी याद आएँगे कभी किसी के लिए

इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया वरना हम भी आदमी थे काम के

कहाँ मैख़ाना का दरवाज़ा ग़ालिब और कहाँ वाइज़ पर इतना जानते हैं, कल वो जाता था कि हम निकले

दिल को मेरे हुआ है कुछ ऐसा गुमान ग़ालिब जैसे कोई कह रहा हो, ये तेरा मकान ग़ालिब

उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा धूल चेहरे पर थी और आईना साफ़ करता रहा

शायरी को साझा करने का तरीका

मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी को आप आसानी से WhatsApp स्टेटस या चैट के रूप में भेज सकते हैं। Facebook और Twitter पर इन्हें साझा कर अपने दोस्तों तक पहुँचा सकते हैं। Instagram पर इन शेरों को सुंदर तस्वीरों के साथ पोस्ट किया जा सकता है। इसके अलावा Telegram और Threads जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर भी ग़ालिब की शायरी साझा करके आप साहित्य और भावनाओं की गहराई को और लोगों तक पहुँचा सकते हैं।

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