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मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी का जादू समय और सीमाओं से परे है। उनके शब्द मोहब्बत, दर्द, उम्मीद और इंसानियत की गहराई को छूते हैं। ग़ालिब का अंदाज़ ऐसा है कि उनकी हर पंक्ति आज भी उतनी ही असरदार लगती है जितनी उनके समय में थी।
हिंदी में ग़ालिब की शायरी पढ़ना हर पाठक के लिए एक नया अनुभव है। उनके शेर केवल भावनाओं को नहीं, बल्कि सोच को भी झकझोर देते हैं। यही वजह है कि वे आज भी अदब की दुनिया में सबसे ऊँचा मुकाम रखते हैं।
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ग़ालिब की शायरी हमें यह एहसास कराती है कि शब्दों की ताक़त कितनी गहरी हो सकती है। उनके लिखे शेर हर दिल की धड़कन को बयां करते हैं और हमें अपने अंदर झाँकने पर मजबूर कर देते हैं।
यहाँ आपके लिए मिर्ज़ा ग़ालिब की कुछ मशहूर शायरी हिंदी में प्रस्तुत की जा रही हैं जो हमेशा दिल को छू जाएँगी।
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी हिंदी
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब, कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
हमें मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है।
न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता।
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के।
दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों, रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों।
दिल के खुश रहने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है, कि हम भी याद आएँगे कभी किसी के लिए।
कहूँ किससे मैं कि क्या है, शब-ए-ग़म बुरी बला है, मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता।
कहाँ मैख़ाना का दरवाज़ा ग़ालिब और कहाँ वाइज़, पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले।
उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ़ करता रहा।
शायरी को साझा करने का तरीका
मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी को आप आसानी से WhatsApp स्टेटस के रूप में डाल सकते हैं या चैट में भेजकर अपने जज़्बात साझा कर सकते हैं। Facebook और Twitter पर पोस्ट कर आप अपने दोस्तों तक उनकी गहराई पहुँचा सकते हैं। Instagram पर इन शेरों को खूबसूरत तस्वीरों के साथ डालना भी बेहद प्रभावी है। इसके अलावा Telegram और Threads जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर भी आप ग़ालिब की शायरी साझा कर सकते हैं।