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मीर तकी मीर उर्दू शायरी की दुनिया के सबसे बड़े नामों में गिने जाते हैं। उनकी शायरी में दर्द, मोहब्बत, तन्हाई और इंसानी जज़्बात की गहराई दिखाई देती है। हिंदी में उनकी शायरी आज भी पढ़ने वालों के दिल को छू लेती है। उनकी ग़ज़लें और शेर इश्क़ और हकीकत के मेल को खूबसूरती से बयां करते हैं।
मीर तकी मीर की शायरी में इंसान की उदासी और मोहब्बत का दर्द दोनों झलकते हैं। उनके शब्द सीधे दिल को छूते हैं और हर दौर के लोगों को अपनी ज़िंदगी से जोड़ते हैं। यही वजह है कि मीर की शायरी आज भी उतनी ही प्रासंगिक और असरदार लगती है।
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हिंदी में मीर की शायरी पढ़ने का एक अलग ही आनंद है। उनकी पंक्तियाँ न सिर्फ साहित्य की धरोहर हैं, बल्कि यह इश्क़ और इंसानी हालात का अनमोल बयान भी करती हैं।
मीर तकी मीर की शायरी
इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही, मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही।
क़र्ज़ की पियें शराब और कहें कि हाँ जी हाँ, तुमने देखा नहीं, शराब पी है कभी।
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इश्क़ में जी रहे हैं लोग मीर, और हम मर रहे हैं धीरे-धीरे।
दिल की वीरानी का क्या हिसाब कहूँ, अब तो हर शहर वीरान लगता है।
आशिकी सब्र-ए-तलब और तमन्ना बेकरार, दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होने तक।
हमसे मत पूछिए कैसे मीर जीते हैं, दिल पे पत्थर रखकर आँसुओं में जीते हैं।
जुबां से कह न सके हाल-ए-दिल, आँख से जो कहा, वही ग़ज़ल हो गई।
नज़र फेर लो तो करम हो जाए, जो देख लो तो सितम हो जाए।
मीर के शेरों में वो असर है, जो दिल की तन्हाई को आवाज़ देता है।
इश्क़ मीर का अनमोल खज़ाना है, हर शेर एक दास्तान सुना जाता है।
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