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मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी में ऐसे अनमोल मोती छिपे हैं जो सिर्फ दो पंक्तियों में जीवन की गहराई और मोहब्बत की सच्चाई को बयान कर देते हैं। उनकी शायरी में शब्दों का जादू और भावनाओं का असर इतना गहरा है कि हर कोई उनसे खुद को जोड़ लेता है।
दो लाइनों की शायरी का सबसे बड़ा कमाल यह है कि यह कम शब्दों में गहरी सोच और एहसास को बयाँ कर देती है। ग़ालिब की यह 2 लाइन शायरी हर पीढ़ी के लिए नई और ताज़ा महसूस होती है।
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मोहब्बत, जुदाई, दर्द और उम्मीद जैसे विषयों पर लिखी गई ग़ालिब की ये शायरी आज भी लोगों के दिलों को छूती है। यही वजह है कि उनकी पंक्तियाँ सोशल मीडिया से लेकर महफ़िलों तक हर जगह सुनाई देती हैं।
यहाँ हम आपके लिए मिर्ज़ा ग़ालिब की बेहतरीन 2 लाइन शायरी प्रस्तुत कर रहे हैं जिन्हें पढ़कर आप उनके अंदाज़-ए-बयां की गहराई महसूस करेंगे।
मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी हिंदी 2 लाइन्स
हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।
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दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों, रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों।
इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब, कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता तो ख़ुदा होता, डुबोया मुझको होने ने, न होता मैं तो क्या होता।
हमें मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है।
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया, वरना हम भी आदमी थे काम के।
कहाँ मैख़ाना का दरवाज़ा ग़ालिब और कहाँ वाइज़, पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले।
उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ़ करता रहा।
दिल के खुश रहने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है, कि हम भी याद आएँगे कभी किसी के लिए।
कहूँ किससे मैं कि क्या है, शब-ए-ग़म बुरी बला है, मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता।
शायरी को साझा करने का तरीका
ग़ालिब की 2 लाइन शायरी को आप WhatsApp पर स्टेटस बनाकर या चैट में भेजकर अपने जज़्बात साझा कर सकते हैं। Facebook और Twitter पर इन्हें पोस्ट करके दोस्तों को प्रभावित कर सकते हैं। Instagram पर इन शेरों को सुंदर तस्वीरों के साथ डालना भी एक बेहतरीन तरीका है। Telegram और Threads जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर भी इन्हें साझा करके आप इस शायरी को और अधिक लोगों तक पहुँचा सकते हैं।